ठेका प्रथा मुख्य तौर पर चार कामों को अंजाम देती है। पहला, मजदूरी को नीचे करना और पूँजीपति की लागत को घटाकर मुनाफे को बढ़ाने में सहायता करना। दूसरा, मजदूर को बेहद असुरक्षित स्थिति में पहुँचा देना, जिससे कि उससे गुलामों की तरह काम लिया जा सके। तीसरा, मजदूरों को संगठित होने से रोकने में सहायता करना। और चौथा, मजदूरों में सर्वहारा चेतना को कुन्द करना। ये चारों चीजें मजदूरों के समक्ष पूँजीपति को और अधिक मजबूत बनाती हैं।