Thursday, 24 March 2016

धर्म में लिपटी वतन परस्ती क्या क्या स्वांग रचाएगी

'धर्म में लिपटी वतन परस्ती क्या क्या स्वांग रचाएगी
मसली कलियाँ, झुलसा गुलशन, ज़र्द ख़िज़ाँ दिखलाएगी
यूरोप जिस वहशत से अब भी सहमा सहमा रहता है
खतरा है वह वहशत म...ेरे मुल्क में आग लगायेगी
जर्मन गैसकदों से अबतक खून की बदबू आती है
अंधी वतन परस्ती हम को उस रस्ते ले जायेगी
अंधे कुएं में झूट की नाव तेज़ चली थी मान लिया
लेकिन बाहर रौशन दुनियां तुम से सच बुलवायेगी
नफ़रत में जो पले बढे हैं, नफ़रत में जो खेले हैं
नफ़रत देखो आगे आगे उनसे क्या करवायेगी
फनकारो से पूछ रहे हो क्यों लौटाए हैं सम्मान
पूछो, कितने चुप बैठे हैं, शर्म उन्हें कब आयेगी
यह मत खाओ, वह मत पहनो, इश्क़ तो बिलकुल करना मत
देश द्रोह की छाप तुम्हारे ऊपर भी लग जायेगी
यह मत भूलो अगली नस्लें रौशन शोला होती हैं
आग कुरेदोगे, चिंगारी दामन तक तो आएगी'
गौहर रज़ा
दिल्ली

Thursday, 10 March 2016

नास्तिक चार्वाक

यावत् जीवेत् सुखम् जीवेत्
ऋणम् कृत्वा घृतम् पिबेत्
भस्मी भूतस्य देहस्य पुनरागमनम् कुतः।।
अर्थात् जब तक जियो, सुख से जियो, कर्जा लेकर घी पीयो, यह नश्वर देह दोबारा नहीं मिलने वाली।
यह भारतीय दर्शन परम्परा के नास्तिक स्कूल चार्वाक दर्शन का सूक्त है। रामराज्य में महर्षि विजय माल्या ने इस सिद्धांत को व्यवहार में उतार कर भारत माता का गौरव बढ़ाया है। इसलिए इसके लिए मोदी जी को श्रेय मिलना चाहिए निंदा नहीं।
बाकी सीमा पर जवान तो शहीद हो ही रहे हैं।