Thursday, 10 March 2016

नास्तिक चार्वाक

यावत् जीवेत् सुखम् जीवेत्
ऋणम् कृत्वा घृतम् पिबेत्
भस्मी भूतस्य देहस्य पुनरागमनम् कुतः।।
अर्थात् जब तक जियो, सुख से जियो, कर्जा लेकर घी पीयो, यह नश्वर देह दोबारा नहीं मिलने वाली।
यह भारतीय दर्शन परम्परा के नास्तिक स्कूल चार्वाक दर्शन का सूक्त है। रामराज्य में महर्षि विजय माल्या ने इस सिद्धांत को व्यवहार में उतार कर भारत माता का गौरव बढ़ाया है। इसलिए इसके लिए मोदी जी को श्रेय मिलना चाहिए निंदा नहीं।
बाकी सीमा पर जवान तो शहीद हो ही रहे हैं।

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