Tuesday, 30 July 2019

तब क्या हुआ जब कांवड़ियों से पूछी गई जाति, देखिए!/





Very true! What a disgusting reality! For those who shout "Jai Bhim" and even those who suffix "Laal Salaam"!
There is no alternative to Class Struggle, through unity of the working class and revolutionary struggle, to abolish capitalism, which is spreading ignorance , superstition, along with unemployment, poverty, inequality!
Casteism is adopted by the bourgeois class and being promoted, as can be seen here!!


Monday, 27 May 2019

Atheism vs religion

Religion is tool in hands of the capitalist class (or earlier classes before capitalism) to be-fool the working class, divide them and exploited them!
However religion, ignorance, superstition cannot be combated unless the material condition of the people (who are suffering from religiosity) is changed which makes them religious.
Few individuals and exceptions do become atheists but mass will not follow the scientific and logical path. They are "forced" to accept the unknown & non-existent god or any other forms due their life conditions, which is full of miseries and uncertainties due capitalism!
They are continuously indoctrinated into religiosity by their families, neighbors, religious & cultural leaders, schools & colleges, government departments, pillars of the bourgeois democracy, media & social media, films, etc.
Change the material conditions of the people, give them social security, like employment, quality & scientific education, free them from religious and reactionary ideologies and propaganda.
Then we will have a society, where atheism will become part of everyone and social environment!
And such a society, a society which is based on scientific and logical theories and justice, has to be a socialist society!
Work for socialism by combating capitalism and not few of the diseased symptoms of capitalism! that means, do not be part of reform-ism but revolution!

Sunday, 7 May 2017

कार्ल मार्क्स: धर्म के बारे- हरिशंकर परसाई के कलम से

सर्वहारा सर्वहारा
लोग कार्ल मार्क्स का बस यही *अफीम वाला वाक्य* ले उड़े है.
कार्ल मार्क्स ने *धर्म* के बारे में लिखा है:
*"धर्म मनुष्य की वेदना और प्रतिरोध की अभिव्यक्ति है. धर्म मनुष्य को भ्रमात्मक सुख देता है, वास्तविक सुख नहीं, जो सामाजिक परिवर्तन से आता है. इसलिए वे परिस्तिथियाँ बदलना जरुरी है जिनमे मनुष्य भ्रमात्मक सुख में भूला रहता है.
धर्म इसलिए जनता के लिए अफीम है.''*
अब आप देखिये:
घर में खाने को नहीं है, तनखा कम, महंगाई बहुत, शोषण अलग, मगर 2-3 घंटे कीर्तन, भजन, धर्मकथा सुनकर सुखी है. यह *भ्रमात्मक सुख* है.
*वास्तविक सुख, जीवन की हालत में सुधार से आता है जिसके लिए "संघर्ष करना" चाहिए.*
शोषक वर्ग, आदमी को धर्म के भ्रमपूर्ण सुख में उलझाये रखता है, ताकि वह वास्तविक सुख के लिए संघर्ष न करे. अन्यथा शोषकों के हितों की हानि होती है.
आप देखते है सारे धार्मिक अनुष्ठान मुनाफाखोर, कालाबाजारी, जमाखोर, शोषक कराते है.
*ये आम आदमी को निष्क्रिय और मूर्ख बनाते है.*
--- *हरिशंकर परसाई*

Monday, 24 October 2016

क्रांति ही एकमात्र विकल्प!

मोदी का जुमला धरातल पर आकर चकना चूर हो गया है! पूंजीवादी मन्दि दस्तक नही, घर मे प्रवेश कर चुकी है! उपर से पूंजीपति और उनके चाटुकार, राजनीतिग्य लुट बढ़ा रहे है, मुनाफे के लिये!
बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और प्रशाशन, सुरक्षा पर बढ़ता हुआ खर्च पूंजीवाद के लिये क़ब्र खोद रहा है! जनता की घटती क्रय शक्ति बने हुए उत्पाद को खरीदने मे असमर्थ है! मन्दि गहरा रहा है! विस्फोट नजदीक है! जरूरत है, मजदूर वर्ग की एकता और क्रांति की तैयारी! ‪#‎Socialism‬

http://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/indias-most-wanted-jobs-jobs-and-jobs/articleshow/51569585.cms#write
मोदी का जुमला धरातल पर आकर चकना चूर हो गया है! पूंजीवादी मन्दि दस्तक नही, घर मे प्रवेश कर चुकी है! उपर से पूंजीपति और उनके चाटुकार, राजनीतिग्य लुट बढ़ा रहे है, मुनाफे के लिये!
बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और प्रशाशन, सुरक्षा पर बढ़ता हुआ खर्च पूंजीवाद के लिये क़ब्र खोद रहा है! जनता की घटती क्रय शक्ति बने हुए उत्पाद को खरीदने मे असमर्थ है! मन्दि गहरा रहा है! विस्फोट नजदीक है! जरूरत है, मजदूर वर्ग की एकता और क्रांति की तैयारी! ‪#‎Socialism‬

http://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/indias-most-wanted-jobs-jobs-and-jobs/articleshow/51569585.cms#write

चुनाव में धर्म के इस्तेमाल की इज़ाज़त नहीं: सुप्रीम कोर्ट

21 ओक्टूबर, 2016 को यह आदेश हुआ! अच्छी बात है!
वैसे जरुरत धर्म निरपेक्ष समाज की नहीं बल्कि धर्म विहीन समाज की है! धर्म वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण से स्तित्वहीन हो चूका है! नास्तिक भगत सिंह को कैसे भूल सकते हैं?
धर्म के ठेकेदार इसे जीवित रखने की हर प्रयास करते हैं! एक तो इन्हें अपने पूंजीपति मालिकों से कमीशन मिलता है जनता के क्रांतिकारी लौ को बुझाने की लिए, और दुसरे इन्हें सत्ता में सीधे या पीछे से भागीदारी मिलाती है! कमाई का एक छोटा हिस्सा यह गुंडों को देते हैं, जो बेरोजगार होते हैं और सड़क पर हफ्ता वसूल करते हैं! उनका काम प्रगतिशील और क्रांतिकारी लोगों को तंग करना और मारना होता है!
पूंजीपति अपने मिडिया को आदेश देते हैं की इनकी खबर को प्रमुखता दें! देखा होगा दो कौड़ी के ऐसे पार्टी के प्रवक्ता बनकर टीवी पर बहस करते हुए!
समाज को बदलना है तो इस व्यवस्था के अन्दर से नहीं होगा! इस प्रजातंत्र के सभी स्तम्भ पूंजीपति की दलाली कर रहे हैं! 500 वर्ष पुराना पूंजीवाद सड़ चूका है, मरानान्सन है! इसे बचने की हर कोशिश बेकार है, बल्कि जनता का कष्ट बढ़ता ही जा रहा है!
सर्वहारा क्रांति ही एकमात्र रास्ता है! समाजवाद ही मानवता का अगला पड़ाव है!

Thursday, 24 March 2016

धर्म में लिपटी वतन परस्ती क्या क्या स्वांग रचाएगी

'धर्म में लिपटी वतन परस्ती क्या क्या स्वांग रचाएगी
मसली कलियाँ, झुलसा गुलशन, ज़र्द ख़िज़ाँ दिखलाएगी
यूरोप जिस वहशत से अब भी सहमा सहमा रहता है
खतरा है वह वहशत म...ेरे मुल्क में आग लगायेगी
जर्मन गैसकदों से अबतक खून की बदबू आती है
अंधी वतन परस्ती हम को उस रस्ते ले जायेगी
अंधे कुएं में झूट की नाव तेज़ चली थी मान लिया
लेकिन बाहर रौशन दुनियां तुम से सच बुलवायेगी
नफ़रत में जो पले बढे हैं, नफ़रत में जो खेले हैं
नफ़रत देखो आगे आगे उनसे क्या करवायेगी
फनकारो से पूछ रहे हो क्यों लौटाए हैं सम्मान
पूछो, कितने चुप बैठे हैं, शर्म उन्हें कब आयेगी
यह मत खाओ, वह मत पहनो, इश्क़ तो बिलकुल करना मत
देश द्रोह की छाप तुम्हारे ऊपर भी लग जायेगी
यह मत भूलो अगली नस्लें रौशन शोला होती हैं
आग कुरेदोगे, चिंगारी दामन तक तो आएगी'
गौहर रज़ा
दिल्ली