Monday, 24 October 2016

क्रांति ही एकमात्र विकल्प!

मोदी का जुमला धरातल पर आकर चकना चूर हो गया है! पूंजीवादी मन्दि दस्तक नही, घर मे प्रवेश कर चुकी है! उपर से पूंजीपति और उनके चाटुकार, राजनीतिग्य लुट बढ़ा रहे है, मुनाफे के लिये!
बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और प्रशाशन, सुरक्षा पर बढ़ता हुआ खर्च पूंजीवाद के लिये क़ब्र खोद रहा है! जनता की घटती क्रय शक्ति बने हुए उत्पाद को खरीदने मे असमर्थ है! मन्दि गहरा रहा है! विस्फोट नजदीक है! जरूरत है, मजदूर वर्ग की एकता और क्रांति की तैयारी! ‪#‎Socialism‬

http://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/indias-most-wanted-jobs-jobs-and-jobs/articleshow/51569585.cms#write
मोदी का जुमला धरातल पर आकर चकना चूर हो गया है! पूंजीवादी मन्दि दस्तक नही, घर मे प्रवेश कर चुकी है! उपर से पूंजीपति और उनके चाटुकार, राजनीतिग्य लुट बढ़ा रहे है, मुनाफे के लिये!
बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और प्रशाशन, सुरक्षा पर बढ़ता हुआ खर्च पूंजीवाद के लिये क़ब्र खोद रहा है! जनता की घटती क्रय शक्ति बने हुए उत्पाद को खरीदने मे असमर्थ है! मन्दि गहरा रहा है! विस्फोट नजदीक है! जरूरत है, मजदूर वर्ग की एकता और क्रांति की तैयारी! ‪#‎Socialism‬

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चुनाव में धर्म के इस्तेमाल की इज़ाज़त नहीं: सुप्रीम कोर्ट

21 ओक्टूबर, 2016 को यह आदेश हुआ! अच्छी बात है!
वैसे जरुरत धर्म निरपेक्ष समाज की नहीं बल्कि धर्म विहीन समाज की है! धर्म वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण से स्तित्वहीन हो चूका है! नास्तिक भगत सिंह को कैसे भूल सकते हैं?
धर्म के ठेकेदार इसे जीवित रखने की हर प्रयास करते हैं! एक तो इन्हें अपने पूंजीपति मालिकों से कमीशन मिलता है जनता के क्रांतिकारी लौ को बुझाने की लिए, और दुसरे इन्हें सत्ता में सीधे या पीछे से भागीदारी मिलाती है! कमाई का एक छोटा हिस्सा यह गुंडों को देते हैं, जो बेरोजगार होते हैं और सड़क पर हफ्ता वसूल करते हैं! उनका काम प्रगतिशील और क्रांतिकारी लोगों को तंग करना और मारना होता है!
पूंजीपति अपने मिडिया को आदेश देते हैं की इनकी खबर को प्रमुखता दें! देखा होगा दो कौड़ी के ऐसे पार्टी के प्रवक्ता बनकर टीवी पर बहस करते हुए!
समाज को बदलना है तो इस व्यवस्था के अन्दर से नहीं होगा! इस प्रजातंत्र के सभी स्तम्भ पूंजीपति की दलाली कर रहे हैं! 500 वर्ष पुराना पूंजीवाद सड़ चूका है, मरानान्सन है! इसे बचने की हर कोशिश बेकार है, बल्कि जनता का कष्ट बढ़ता ही जा रहा है!
सर्वहारा क्रांति ही एकमात्र रास्ता है! समाजवाद ही मानवता का अगला पड़ाव है!

Thursday, 24 March 2016

धर्म में लिपटी वतन परस्ती क्या क्या स्वांग रचाएगी

'धर्म में लिपटी वतन परस्ती क्या क्या स्वांग रचाएगी
मसली कलियाँ, झुलसा गुलशन, ज़र्द ख़िज़ाँ दिखलाएगी
यूरोप जिस वहशत से अब भी सहमा सहमा रहता है
खतरा है वह वहशत म...ेरे मुल्क में आग लगायेगी
जर्मन गैसकदों से अबतक खून की बदबू आती है
अंधी वतन परस्ती हम को उस रस्ते ले जायेगी
अंधे कुएं में झूट की नाव तेज़ चली थी मान लिया
लेकिन बाहर रौशन दुनियां तुम से सच बुलवायेगी
नफ़रत में जो पले बढे हैं, नफ़रत में जो खेले हैं
नफ़रत देखो आगे आगे उनसे क्या करवायेगी
फनकारो से पूछ रहे हो क्यों लौटाए हैं सम्मान
पूछो, कितने चुप बैठे हैं, शर्म उन्हें कब आयेगी
यह मत खाओ, वह मत पहनो, इश्क़ तो बिलकुल करना मत
देश द्रोह की छाप तुम्हारे ऊपर भी लग जायेगी
यह मत भूलो अगली नस्लें रौशन शोला होती हैं
आग कुरेदोगे, चिंगारी दामन तक तो आएगी'
गौहर रज़ा
दिल्ली

Thursday, 10 March 2016

नास्तिक चार्वाक

यावत् जीवेत् सुखम् जीवेत्
ऋणम् कृत्वा घृतम् पिबेत्
भस्मी भूतस्य देहस्य पुनरागमनम् कुतः।।
अर्थात् जब तक जियो, सुख से जियो, कर्जा लेकर घी पीयो, यह नश्वर देह दोबारा नहीं मिलने वाली।
यह भारतीय दर्शन परम्परा के नास्तिक स्कूल चार्वाक दर्शन का सूक्त है। रामराज्य में महर्षि विजय माल्या ने इस सिद्धांत को व्यवहार में उतार कर भारत माता का गौरव बढ़ाया है। इसलिए इसके लिए मोदी जी को श्रेय मिलना चाहिए निंदा नहीं।
बाकी सीमा पर जवान तो शहीद हो ही रहे हैं।

Tuesday, 2 February 2016

'Your son has killed two kafirs. I slit their throats with a dagger'

Common master USA imperialist, who created these ugly, brainless terrorists, is smiling, more sell of outdated weapons and super profit! Did you come across a news, which says ISIS will help revive EU economy!
Many dumb will abuse these 'worms' and feel happy to have accomplished their duties!
Say no to religion, scientifically and philosophically outdated ideology, being revived by the rulers, to keep you divided and generate profit for themselves!!
#Socialism
Full post on TOI: http://timesofindia.indiatimes.com/india/Your-son-has-killed-two-kafirs-I-slit-their-throats-with-a-dagger/articleshow/50829483.cms
(Read it to see the equally brainless comments, making the ruling class happier)

Saturday, 2 January 2016

ठेका प्रथा

ठेका प्रथा मुख्य तौर पर चार कामों को अंजाम देती है। पहला, मजदूरी को नीचे करना और पूँजीपति की लागत को घटाकर मुनाफे को बढ़ाने में सहायता करना। दूसरा, मजदूर को बेहद असुरक्षित स्थिति में पहुँचा देना, जिससे कि उससे गुलामों की तरह काम लिया जा सके। तीसरा, मजदूरों को संगठित होने से रोकने में सहायता करना। और चौथा, मजदूरों में सर्वहारा चेतना को कुन्द करना। ये चारों चीजें मजदूरों के समक्ष पूँजीपति को और अधिक मजबूत बनाती हैं।